Latest News

2 Sep 2018

एससी-एसटी ऐक्ट पर बढ़ी बीजेपी की मुश्किल, एमपी में घेरे जा रहे मोदी-शिवराज के मंत्री : मध्यप्रदेश


भोपाल। केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए एससी-एसटी ऐक्ट में किए गए संशोधन का विरोध अब बढ़ता जा रहा है। समाज का एक बड़ा वर्ग इस संशोधन का विरोध कर रहा है। शनिवार को इस विरोध की आंच मोदी और शिवराज सिंह चौहान के मंत्रियों को भी महसूस हुई। बता दें कि सवर्ण समाज 4 सितंबर को ग्वालियर में बड़ी रैली भी कर रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में सवर्ण कर्मचारियों का संगठन 'सपाक्स' केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहा है। यही नहीं सपाक्स ने पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगाई है। यहां यह भी बताना उचित होगा कि मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों ने जातीय आधार पर अपने संगठन बना रखे हैं, इन्हें सरकार ने मान्यता भी दी है और आईएएस अफसर भी इन संगठनों से जुड़े हैं। सवर्ण कर्मचारियों का संगठन सपाक्स लंबे समय से प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहा है। अपनी इस मुहिम में उसने समाज को भी जोड़ा है। इस मुहिम का सीधा असर शनिवार को कई जिलों में देखने को मिला। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत शनिवार को गुना में थे, उनके साथ सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी थे। सपाक्स के लोगों ने मंत्री और सांसद को सर्किट हाउस में घेर लिया, उनके खिलाफ नारेबाजी की। हालात ऐसे बने कि पुलिस को इन दोनों को सर्किट हाउस के पिछले दरवाजे से बाहर निकालना पड़ा। ऐसे ही हालात का सामना विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संसदीय क्षेत्र विदिशा में करना पड़ा। सपाक्स कार्यकर्ताओं ने सर्किट हाउस में अकबर और बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन को वापस लेने की मांग की। विरोध कर रहे लोगों ने अकबर को एक ज्ञापन भी दिया। भिंड से बीजेपी सांसद भगीरथ प्रसाद को भी अपने क्षेत्र में लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। हालत यह बनी कि संसद एसपी को लेकर पोस्ट ऑफिस के कार्यक्रम स्थल पर पंहुचे। मुरैना में शिवराज के मंत्री रुस्तम सिंह को काले झंडे दिखाए गया। लोगों ने उनका रास्ता रोका, काले झंडे दिखाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर मंत्री को निकाला। 
गौरतलब है कि सपाक्स का आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल रहा है, इसकी शुरुआत ग्वालियर से हुई थी। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सबसे ज्यादा हिंसा ग्वालियर संभाग में हुई थी। तब सवर्ण अफसरों को निशाना बनाया गया था, उसके बाद सवर्ण समाज एकजुट हुआ। 4 सितंबर को सपाक्स ने ग्वालियर में एक बड़ी रैली का आयोजन किया है, जिसमें पूरे प्रदेश से लोगों को बुलाया गया है। सपाक्स के इस आंदोलन ने बीजेपी और कांग्रेस दोनो की नींद उड़ा रखी है क्योंकि इस मुद्दे पर दोनों साथ हैं। सपाक्स ने विधानसभा चुनाव में दोनों का विरोध करने का ऐलान किया है। प्रदेश में ढाई महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। 

No comments:

Post a Comment