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22 Sep 2018

एससी/एसटी ऐक्ट पर बवाल के बीच सवर्ण जातियों, ओबीसी का रोष कम करने की कोशिश में बीजेपी : नई दिल्ली


नई दिल्ली। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और एससी/एसटी ऐक्ट को लेकर बीजेपी के लिए रास्ता कठिन होता दिख रहा है। इस ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के बाद मोदी सरकार को सवर्ण और ओबीसी जातियों के एक बड़े तबके का विरोध झेलना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐक्ट के तहत त्वरित गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी जिसे बाद में मोदी सरकार न अध्यादेश से पलट दिया।अब बीजेपी इन जातीय समूहों को मनाने में जुटी है। बीजेपी अब यह समझा रही है कि एससी-एसटी ऐक्ट का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तो लोगों ने सड़कों पर उतरकर बीजेपी सरकार का विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहाल करने की मांग की है। चुनावी मौसम में ये प्रदर्शन बीजेपी के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। हालांकि मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को दावा किया कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ऐक्ट का दुरपयोग न हो और बिना जांच के कोई गिरफ्तार नहीं किया जाए। उधर, बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में भी पिछड़ी और सवर्ण जातियों के बीच ऐसा ही संदेश देने के लिए ग्राउंड वर्क शुरू कर दिया है। यूपी के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने शुक्रवार को इलकी जानकारी दी है। 
बृजेश पाठक ने कहा कि बीजेपी पूरे राज्य में ब्लॉक स्तर तक जाकर सवर्ण और पिछड़ी जातियों से संपर्क कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि जमीन पर हालात कैसे हैं तो पाठक ने कहा, 'पार्टी हलवाई, यादव, जाट, चौरसिया, राजभर, कुर्मी आदि से अलग-अलग बैठकें कर रही है। हम उन्हें बता रहे हैं कि बीजेपी सर्व समाज के लिए हैं। हम आप सभी का प्रतिनिधित्व करते हैं और पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि आपके खिलाफ कानून का दुरुपयोग न हो।'पार्टी ने इन समुदायों को सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे फर्जी केसों से भी बचने को लेकर चेताया है। उन्होंने कहा कि इन समुदायों से कहा गया है कि शरारती तत्वों के दुष्प्रचार से बचकर रहें। हालांकि यह मसला बीजेपी के लिए दोधारी तलवार जैसा है। बीजेपी के इस तरह के प्रयास और शिवराज सिंह चौहान के इन बयानों से दलितों के खिलाफ हो जाने का खतरा है जो हालिया समय में दलितों के खिलाफ हिंसा बढ़ने को लेकर सरकार पर हमलावर रहे हैं। 

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