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2 Sep 2018

हाइवे पर वसूली कर रहे थे कथित गोरक्षक, चौकी में पीटे गए : कानपुर


कानपुर। नैशनल हाइवे-2 पर वसूली कर रहे कथित गोरक्षकों ने पशु व्यापारी को दौड़ाकर पीटा। इसके बाद मवेशियों से भरी गाड़ी की टक्कर से टूटे बिजली के पोल से भड़के ग्रामीणों ने हमलावरों की पिटाई कर दी और पुलिस चौकी ले गए। वहां पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत किया। शनिवार को मामला सामने आया तो पुलिस सक्रिय हुई और रिपोर्ट लिखी गई। हालांकि शुक्रवार को समझौतानामा लिखवा लिया गया था।कानपुर के नजदीक स्थित फतेहपुर जिले में हर शुक्रवार को मवेशियों का बाजार लगता है। शुक्रवार दोपहर हाथीपुर गांव का अब्बास अपनी डीसीएम गाड़ियों में भैंसों को लेकर लौट रहा था। महाराजपुर क्षेत्र में हाइवे पर कुछ युवकों ने उसे रोका। कथित गोरक्षकों ने अब्बास से 10 हजार रुपये मांगे। इनकार करने पर वे उसे बाहर निकालकर पीटने लगे। इसके बाद 2 हजार रुपये देने की बात पर अब्बास ने हमलावरों को झांसा दिया और अचानक गाड़ी लेकर भाग निकला लेकिन बाइक से हमलावर अब्बास का पीछा करने लगे। सरसौल चौकी के लिए मुड़ते समय चारों ने व्यापारी की चलती गाड़ी का स्टेयरिंग अपने नियंत्रण में ले लिया। बेकाबू गाड़ी प्रधान किरण शुक्ला के घर के बाहर खड़े ट्रैक्टर से टकराई। ट्रैक्टर बिजली के पोल से टकराया और पोल टूट गया। इस बीच हमलावरों ने अब्बास को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। यह देख प्रधान के पति रज्जन शुक्ला, अशरफी और राम मिलन वहां आए तो हमलावरों ने उन्हें पीट दिया। 
खबर फैलते-फैलते कई ग्रामीण भी वहां आ गए और जवाब में हमलावरों की पिटाई की। चारों कथित गोरक्षकों को लाठी से पीटते हुए सरसौल चौकी ले जाया गया। यहां भी पुलिस के सामने मारपीट हुई, लेकिन बाद में सिपाहियों ने सभी को अलग किया। शनिवार को चौकी में पिटाई का विडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। दोनों पक्षों के चार-चार लोगों को हिरासत में लेकर रिपोर्ट लिखी गई। इनकी चोटों का मेडिकल परीक्षण कराया गया।एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न कुमार सिंह ने महाराजपुर थाने के इंस्पेक्टर उमेश कुमार सिंह को जमकर फटकारा। सीओ (सदर) रवि कुमार के अनुसार, लापरवाही में एक सिपाही बृजेश को निलंबित कर दिया गया है। हमलावर पूरी तरह अराजकतत्व थे। इनका किसी संगठन से कोई संबंध नहीं मिला है।सूत्रों के अनुसार, महाराजपुर में हाइवे पर लंबे समय से मवेशी व्यापारियों से वसूली का खेल चलता है। हर व्यापारी से 10 हजार रुपये वसूले जाते हैं। न देने पर पिटाई आम बात है। यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस हमलावरों को संरक्षण देती है। रुपये देने में आनाकानी करने वाले व्यापारियों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम में रिपोर्ट लिखी जाती है। 

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