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27 Sep 2018

कंगाली की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तान को आईएमएफ से अंतिम उम्मीद : दिल्ली


नई दिल्ली। कंगाली की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तान को अंतिम उम्मीद आईएमएफ से है। नव निर्वाचित इमरान खान की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ध्वस्त हो चुकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की है। इन चुनौती के बीच आईएमएफ की एक टीम गुरुवार को पाकिस्तान पहुंची और अगले चार दिनों के दौरान हालात की समीक्षा कर मदद देने के बारे में फैसला लेगी। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के पास अपना खर्च चलाने के लिए अधिकतम दो महीने की राशि बची हुई है। कहा जा रहा है कि अगर तुरंत हालात में कुछ सुधार नहीं हुआ तो देश में आर्थिक आपातकाल लगाया जा सकता है।इस बार पाकिस्तान का संकट इतना गहरा है कि आईएमएफ भी पाकिस्तान की आर्थिक कंगाली को ठीक करने की दिशा में अधिक रुचि नहीं दिखा रहा है। पिछले तीन दशक में कई मौकों पर जब-जब पाकिस्तान के समक्ष इस तरह का संकट आया, आईएमएफ ने आगे बढ़ाकर मदद की थी। इस बार अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के कारण आईएमएफ के पास मदद करने की सीमाएं भी हैं। 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी वहां की मुद्रा के अवमूल्यन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा वहां बजट घाटा 1990 के बराबर पहुंच गया है, जब देश दिवालिया होने के करीब था। व्यापार घाटा भी बेहिसाब हो चुका है। इनके बीच पाकिस्तान के अपने उपक्रम को बेचकर धन जुटाने की कोशिश भी सफल नहीं हुई। ऐसे में पाकिस्तान के पास जरूरी सेवाओं के लिए राशि का संकट हो गया है।पाकिस्तान मौजूदा आर्थिक संकट से उबरने के लिए चीन की ओर भी उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन दिलचस्प बात है कि पाकिस्तान की इस दुर्दशा के लिए चीन मुख्य रूप से जिम्मेदार है। फिलहाल सिर्फ चीन से 50 बिलियन डॉलर से अधिक का कर्जदार हो चुका है। पाकिस्तान की जर्जर आर्थिक हालत के बीच चीन ने अब तक कोई उत्साही रवैया नहीं दिखाया है।पाकिस्तान के सामने यह संकट और गहरा सकता है। अगर उसने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी नीति में बदलाव करते हुए इसपर रोक नहीं लगाने की कोशिश की। पाकिस्तान को जब आतंकवाद को बढ़ाने वाला देश बताकर अमेरिका की ट्रंप सरकार ने जब ग्रे लिस्ट में डाला तो पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद बहुत प्रभावित हुई है। इस लिस्ट के अनुसार विदेश से मिलने वाली कर्ज की सीमा तय होती है। अब ट्रंप सरकार और सख्त रवैया दिखाते हुए पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की तैयारी में है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए और बुरे दिन आ जाएंगे और एक-एक पैसे के लिए मुल्क तरस सकता है। ऐसे में आईएमएफ या दूसरे देशों से कर्ज लेने की संभावना बुरी तरह प्रभावित हो जाएगी। 

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