Latest News

11 Jul 2018

बंगाल से लेकर NCR तक 7 बार बिकने वाली किशोरी की आपबीती : गाजियाबाद


गाजियाबाद। जिस्मफरोशी का धंधा कराने वाले गिरोह से छुड़ाई गई पश्चिम बंगाल के हावड़ा की किशोरी बेहतर जिंदगी का सपना संजोए एक अनजान युवक के साथ घर से निकली थी। जिंदगी बेहतर तो हुई नहीं, बल्कि नरक से भी बदतर हो गई। किशोरी ने पुलिस को बताया कि पिछले तीन महीने उसने नरक से बदतर हालात में गुजारे हैं। मानव तस्करी और देह व्यापार कराने वाले गैंग के चंगुल से आजाद हुई पीड़िता ने अपने दर्द की दास्तान इसी लाइन के साथ शुरू की। किशोरी ने बातचीत में कहा कि उसने इन तीन महीनों में जिस तरह के जुल्म और ज्यादती सही है, वह रूह को कंपाने वाली है। उसने कहा कि जिस जगह से वह बाहर आई है, उससे खराब जगह और कुछ नहीं हो सकती। किशोरी काफी डरी हुई है, बात-बात में अपने ऊपर हुए जुल्मों को याद कर सिहर उठती है।किशोरी ने बताया कि मार्च के महीने में उसे एक अनजान नंबर से कॉल आई थी जिसे पहले उसने रॉन्ग नंबर सोचकर इग्नोर कर दिया। इसके बाद उस नंबर से कई कॉल्स आईं, सामने वाले ने अपना नाम अशरफुल बताया। रोजाना बातचीत होने लगी थी, इसलिए हम दोनों की दोस्ती हो गई। अशरफुल ने खुद को अमीर घर का बताया था। वहीं, उसके परिवार की माली हालत अच्छी नहीं थी। उसके पांच भाई-बहन हैं। माता-पिता बुनाई का कार्य करते थे, जिससे कुछ खास आमदनी नहीं होती थी। 4 अप्रैल को वह मां को उलेबेरिया में एक अस्पताल में लेकर गई थी। वहां अशरफुल भी पहुंच गया। ऐसे में वह बेहतर जीवन की चाह में अशरफुल के साथ चली गई। अशरफुल शादी करने की बात बोलकर उसे गाजियाबाद लाया था, लेकिन यहां आकर उसने ऐसा नहीं किया। उसने उसे देह व्यापार के नरक में झोंक दिया। कुछ दिन बाद उसे पता चला कि अशरफुल ने उससे दोस्ती सिर्फ इसी उद्देश्य के लिए की थी। अशरफुल पहले से ही शादीशुदा था और उसका एक बेटा भी था। 
पीड़िता ने नम आंखों के साथ बताया कि उसे गाजियाबाद लाते ही 30 हजार रुपये में बेच दिया गया था। इसके बाद उसे बेचने का सिलसिला ही शुरू हुआ। उसे किसी एक को नहीं कई लोगों को पैकेज के रूप में बेचा गया था। 10 दिन एक जगह तो 10 दिन दूसरी जगह पर रहा करती थी। जहां उससे देह व्यापार करवाया जाता था। एक व्यक्ति एक हजार रुपये देता था जिसमें से 900 रुपये मुझे लेकर गए व्यक्ति को देने होते थे, 100 रुपये मुझे मिलते थे। जब उन्हीं रुपयों को इकट्ठा कर दोबारा गाजियाबाद आती थी तो वे रुपये भी मारपीट कर मुझसे छीन लिए जाते थे। सोनिया और उसका पति राकेश मुझे हर तरह से तोड़ रहे थे। मैंने कुछ दिन बीतने के बाद यहां से निकलने की उम्मीद छोड़ दी थी।पीड़िता ने बताया कि पूरे दिन उसके जिस्म को बेचा जाता था। जब वह उनकी बात मानने से इनकार करती थी तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी। इस पर भी नहीं मानने पर उसे सिगरेट से जलाया जाता था। अंत में मजबूर होकर उसे उनकी बात माननी ही पड़ती थी। किशोरी ने बताया कि उसे खाने-पीने को भी नहीं दिया जाता था। हर वक्त कोई न कोई उसके साथ होता था। इसके चलते वह कभी उस नरक से निकलने की सोच भी नहीं पाती थी। 
किशोरी ने बताया कि उसके अलावा और भी लड़कियां वहां थीं, जो कुछ भी नहीं बोलती थीं। जब उसने उनसे मदद मांगी तो उसे जवाब मिला 'अब जिंदगी ऐसे ही कटेगी।' पुलिस की कार्रवाई के वक्त भी उन लड़कियों ने कुछ नहीं बोला था। पीड़िता ने बताया कि इस धंधे में एक महिला भी उसे मिली जो एक बच्चे की मां थी और मजबूरी में देह व्यापार में आ गई थी। वह रुपये मिलने पर गाजियाबाद से मेरठ आया करती थी। पुलिस ने उसे भी बरामद किया है।

No comments:

Post a Comment