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16 Jul 2018

विश्व जैन संगठन ने जीवित पशु निर्यात को रोके जाने की मांग की : इटावा


इटावा। लालपुरा जैन धर्मशाला में जैन आचार्य श्री 108 विनम्र सागर महाराज के सानिध्य में जैन विश्व संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया । संगठन ने कहा माननीय सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखण्ड हाइ कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में अनुच्छेद 21 में पशुओं को मनुष्यों के समान सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार और अनुच्छेद 51ए (जी ) में प्रत्येक नागरिक को प्राणीमात्र के प्रति दया व जिम्मेवारी हेतु मौलिक कर्तव्य हेतु वर्णित है इसके बावजूद भी भारत से बढ़ते माँस निर्यात के साथ देश में घट रहे पशुधन के बावजूद जीवित पशु निर्यात अनुमति को निरस्त किया जावे । भगवान श्री राम , कृष्ण , महावीर , गुरुनानक जी , महात्मा गाँधी का भारत (सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत ) से विदेशी लोगों का भोजन बनाने और चंद माँस व्यापारियों द्वारा किसानों की आय के नाम पर अपनी तिजोरियां भरने हेतु अपने देश का पशुधन भेजने की अनुमति देना भारतीय संस्कृति नहीं । अत : जीवित पशु निर्यात रद्द कर मूक पशुओं की रक्षा की जावे । 
नम्बर 2014 में 5 वर्षों में आयोजित होने वाले नेपाल के प्रसिद्ध गढ़ीमाई उत्सव में दी जाने वाली बलि हेतु भारत से अनाधिकृत रूप से ले जाये जाने वाले 4 लाख पशुओं के निर्यात पर गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल को आदेश जारी किये थे तो 1 लाख निर्दोष पशु अरब क्यों भेजे जा रहे हैं , जिसे बंद किया जावे । विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन के आह्वान पर सकल जैन समाज के लोगों ने जीवित पशु निर्यात को लेकर अपना मौन विरोध दिनांक 15 जुलाई को प्रकट करते हुये जीवित पशुओं के निर्यात को रोके जाने की माँग की । इस मौके पर जैन समाज से बहुत लोग उपस्थित रहे जिनमे इटावा शाखा के अध्यक्ष आकाश दीप जैन , महामंत्री राजीव जैन , कोषाध्यक्ष मनोज जैन , मीडिया प्रभारी नितिन जैन , पार्श्वनाथ दि. जैन नशियां जी इटावा के अध्यक्ष संजीव जैन संजू , अनुज जैन , शुभम जैन , धर्मेंद्र कुमार जैन , नीरज जैन , महेंद्र जैन , नरेंद्र जैन  आदि पुरुष व महिलाएँ भी  मौजूद रहे ।

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