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3 Jul 2018

पूर्व डी आई जी ने अपनी बहू को निकाला घर से बाहर : कानपुर


आकाश मिश्रा,(कानपुर)। यहां देश और प्रदेश की सरकार बोल रही है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वही एक मामला कानपुर का सामने आया, पूर्व डी आई जी ने  अपनी बहू को घर से बाहर निकाल दिया क्या यही देश और प्रदेश सरकार का यही नारा है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अब देखते है क्या होता है पीड़ित को इंसाफ मिलेगा की नही।
प्रदेश के मुख्यमंत्री चाहे जितने दावे करें कि सूबे में कानून का राज है और यहां महिलाएं सुरक्षित हैं, पर जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। सूबे में कानून का नहीं बल्कि पैसे और रुतबे वाले दबंगों का शासन है और महिलाएं इनके हाथों रोज ही बुरी तरह प्रताड़ित की जा रही हैं। ताज़ा मामला कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र का है जहां एक दबंग रिटायर DIG की पहुंच और रुतबे के आगे उसकी साधनविहीन बहू की गुहार दम तोड़ती जा रही है। पीड़िता का नाम प्रीति प्रियदर्शी पत्नी आशीष प्रियदर्शी निवासिनी ई ब्लॉक 195 पनकी, कानपुर नगर है। पीड़िता और उसके पति दोनों की दूसरी शादी है, जो कि विगत 07 जून 2014 को सम्‍पूर्ण हिन्‍दू रीति रिवाजों के साथ हुयी थी। शुरू से ही पीड़िता के ससुरालीजन उसको दहेज को लेकर प्रताडित करते रहते थे, परन्‍तु पीड़िता लोकलाज के भय से सबकुछ बर्दाश्‍त करती रही। पीड़िता के पति को पहली शादी से भी एक बेटी है और जब पीड़िता को भी दो बेटियां हो गयीं तो पीड़िता के पति और ससुराल वालों ने उसे शा‍रीरिक और मानसिक रूप से बेतहाशा प्रताडित करना प्रारम्‍भ कर दिया। पीड़िता प्रीति के ससुर जो कि उत्‍तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड डीआईजी हैं, ने अपने पुत्र को शराबी व कमजोर बताकर लड़का पैदा करने के उद्देश्‍य से प्रीति पर कई दफे अपने साथ शारीरिक सम्‍बन्‍ध बनाने के लिये दबाव बनाया। प्रीति के मना करने पर उसके साथ मारपीट, छेड़छाड़ एवं गाली गलौज की गई। हद तो तब हो गयी जब विगत 24 अप्रैल 17 को प्रीति के  पति उसे और उसके बच्चों को बेसहारा छोड़कर बगैर बताये घर से भाग गए। तब से पीड़िता प्रीति अपने दो छोटे बच्चों को लेकर ई ब्लॉक 195 पनकी में रह रही थी, ये मकान प्रीति के पति के नाम है।
विगत दिनों जब प्रीति अपनी छोटी बच्ची का इलाज कराने राजगढ़, मध्‍य प्रदेश अपने मायके गई थी, तब उसके सास-ससुर एवं पति ने स्‍थानीय पुलिस के सहयोग से उक्‍त घर पर प्रीति का लगाया ताला तोड़ कर कब्जा कर लिया। प्रीति का कीमती सामान, जेवर इत्‍यादी लूट लिया एवं बाकी बचा समान बाहर लावारिस फेंक दिया। 26 जून 18 को जब प्रीति कानपुर वापस आई और अपने घर गयी तो उसकी सास, ससुर एवं उनके सहयोगी कुछ पुलिस वालों ने उसको बुरी तरह मारापीटा, गाली गलौज की, उसकी बच्‍चियों को जमीन पर पटक दिया, उसे जानमाल की धमकियां दीं, उसका मंगलसूत्र छीन लिया और धक्‍के मार कर उसे वहां से भगा दिया।
स्‍थानीय पुलिस पूरी तरह प्रीति के ससुर के दबाव में है क्‍योंकि वो सेवानिवृत्‍त डीआईजी हैं। विभागीय मामला होने के कारण पुलिस पूरी तरह प्रीति के ससुर का साथ दे रही है। थाना स्‍तर पर प्रीति की रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही है, उलटा पुलिसकर्मी पीड़ित के ऊपर दबाव बना रहे हैं कि वो कानूनी कार्यवाही न करे और अपने मायके लौट जाये वरना वो लोग उसे झूठे मुकदमे में फंसा कर जेल भिजवा देंगे। पीड़िता अपनी छोटी छोटी बेटियों के साथ बेघर अवस्‍था में है और सड़क पर जीवनयापन करने को मजबूर है। पीड़िता एवं उसकी पुत्रियों के जीवन को उपरोक्‍त आरोपियों से गम्‍भीर खतरा है। कई अज्ञात असलहाधारी आते जाते पीड़िता का पीछा करते हैं, रास्‍ते में रोक कर बलात्‍कार करने एवं तेजाब डालने की धमकी देते हैं।

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