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11 Jul 2018

6 साल से पुलिस और हत्यारों के बीच दीवार बना एक लैपटॉप : अनसुलझी मर्डर मिस्ट्रीज


नई दिल्ली। हर अपराध के पीछे कोई मकसद होता है। कहावत है कि कोई भी अपराध तीन वजहों से होता है: जर, जोरू और जमीन। पुलिस भी अपराधियों का सुराग इन्हीं तीन कारणों को ध्यान में रखते हुए लगाने की कोशिश करती है। अधिकतर मामले सुलझ जाते हैं, लेकिन कई मामले ऐसे होते हैं जो गहन व लंबी तफ्तीश के बावजूद नहीं सुलझ पाते। शकरपुर इलाके में हुई बरारू दंपती की हत्या एक ऐसा ही मामला है, जिसके कारणों और कातिलों का आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। यह हत्याकांड 2012 में हुआ था। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर आरके बरारू (75) व उनकी पत्नी दुर्गा देवी बरारू (72) को उन्हीं के घर में मौत की नींद सुला दिया गया था।21 अगस्त 2012 की शाम लगभग साढ़े 7 बजे पुलिस को सूचना मिली कि बी ब्लॉक, शकरपुर के एक घर के फर्स्ट फ्लोर पर दो लोगों की हत्या कर दी गई है। सूचना के बाद पीसीआर वैन के साथ शकरपुर थाना पुलिस के अलावा ईस्ट डिस्ट्रिक्ट जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे। मृतकों की पहचान आरके बरारू व दुर्गा देवी बरारू के रूप में की गई। दोनों ही शव घर के अलग-अलग हिस्सों में पाए गए। आरके बरारू ड्रॉइंग रूम में मृत पड़े थे और उनकी पत्नी दुर्गा देवी बाथरूम में मृत पाई गईं। दोनों की हत्या में एक चीज सामान्य थी। हत्या धारदार हथियार से की गई थी। दोनों के सिर व गले पर धारदार हथियार से वार किया गया था। मौका-ए-वारदात का मुआयना करने पर पुलिस ने पाया कि हत्यारा जो भी हो, वह मृतकों का परिचित था क्योंकि घर में फ्रेंडली एंट्री की गई थी। कहीं भी किसी तरह का कोई विरोध नजर नहीं आया था। घर का सारा सामान बिखरा हुआ था। अलमारी भी खुली थी। लग रहा था कि हत्यारे ने कत्ल करने के बाद पूरा घर खंगाला था। हत्या के पीछे या तो लूट का मकसद हो सकता था या फिर कोई प्रॉपर्टी आदि के दस्तावेज। बरारू दंपती के तीन बच्चे हैं। दो बेटे व एक बेटी। बड़ा बेटा जयकिशन नोएडा में व छोटा बेटा मुंबई में रहता है। बेटी भी अपने परिवार के साथ नोएडा में ही रहती है। इन तीनों को भी यह नहीं पता था कि आखिर घर से क्या सामान गायब हुआ‌? 
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि शव को सबसे पहले उनके घर में काम करने वाली मेड ने देखा था। वह शाम लगभग 7:30 बजे जब उनके घर पर काम करने के लिए आई तो दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। वह अंदर घुसी तो उसकी चीख निकल गई। ड्रॉइंग रूम में आरके बरारू का शव लहूलुहान पड़ा हुआ था। यह देख वह बाहर भागी और शोर मचा दिया। बाद में मालूम हुआ कि दुर्गा देवी की भी हत्या कर दी गई है। फिर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।मेड ने पुलिस को यह भी बताया था कि वह दोपहर लगभग ढाई बजे इनके घर से काम करके गई थी। उस समय तक सब सही था। जब शाम को वापस आई तो दोनों की हत्या हो चुकी थी। बरारू का घर चार मंजिल का था। वे फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे, जबकि बाकी की तीनों मंजिलों में किराएदार रखे हुए थे। 
चौंकाने वाली बात यह थी कि किसी ने भी किसी तरह की चीख-पुकार की कोई आवाज नहीं सुनी। न तो किसी को आते देखा और न ही जाते। सीसीटीवी भी नहीं मिला, जिसमें किसी तरह की कोई फुटेज आई हो।हाइप्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस ने तुरंत ही जांच शुरू कर दी। 20 से ज्यादा टीमों का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने पहले तो बिल्डिंग में रहने वाले किराएदारों से पूछताछ की। मेड से पूछताछ की, जिसने जो बताया उसे वेरिफाई किया गया। गली में सब्जी बेचने वाले, कबाड़ी वाले, अखबार वाले, प्लंबर, इलेक्ट्रिशन आदि सभी को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उस समय बरारू दंपती के घर के पास ही दो मकानों का निर्माण चल रहा था। वहां काम करने वाले मजूदरों से पूछताछ की गई। प्रॉपर्टी डीलरों से भी पूछताछ की गई, जो घरों में किराएदार आदि रखवाने का काम करते हैं। कुल मिलाकर 500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई लेकिन पुलिस को कोई ऐसा नहीं मिला, जिसका इस हत्याकांड से किसी तरह का कोई लेना-देना हो। 
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौका-ए-वारदात को देखकर साफ लग रहा था कि हत्यारा वारदात के बाद घर से कुछ लेकर गया है। मृतकों के बच्चों के अनुसार, वारदात के पीछे लूट का मकसद था और घर से लाखों के गहने व नकदी लूटी गई थी, लेकिन कोई ठीक-ठीक नहीं बता सका कि कितनी नकदी व किस तरह के गहने। जांच में पता चला कि आरके बरारू का मोबाइल फोन, लैपटॉप व इंटरनेट डाटा कार्ड भी गायब है। पुलिस ने आरके बरारू व उनकी पत्नी दुर्गा देवी के मोबाइल फोन की कॉल डीटेल आदि भी खंगाली। उसके आधार पर भी कई लोगों से पूछताछ की, लेकिन यहां भी पुलिस को असफलता ही हाथ लगी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि ईस्ट डिस्ट्रिक्ट को जब कोई सुराग नहीं मिला तो क्राइम ब्रांच को भी इस मामले में लगाया गया। क्राइम ब्रांच की शकरपुर यूनिट की एक टीम ने कुछ सेंधमारों को पकड़ा था जिसके बाद उन्होंने दावा किया बरारू दंपती हत्याकांड सुलझ गया है। सेंधमारों ने लूट के मकसद से वारदात को अंजाम दिया था। ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस को यह सूचना दी गई। ईस्ट डिस्ट्रिक्ट की पुलिस टीम भी उन सेंधमारों से पूछताछ करने के लिए क्राइम ब्रांच ऑफिस पहुंची लेकिन जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो फैक्ट्स वेरिफाई नहीं हो पाए। सेंधमार न तो घर की लोकेशन और न ही उसके अंदर की लोकेशन ठीक तरह से बता पाए।पुलिस अधिकारी ने बताया कि शायद क्राइम ब्रांच के दबाव में सेंधमारों ने इस मामले में लिप्त होने की बात को स्वीकार कर लिया था लेकिन जब क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में बताया गया तो फिर सेंधमारों को इस हत्याकांड से अलग कर दिया गया और इस मामले में उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई।
पुलिस को एक सुराग जरूर मिला कि आरके बरारू को लैपटॉप चलाना नहीं आता था और इसे सीखने के लिए वह किसी से होम ट्यूशन ले रहे थे। पुलिस को यह काफी अहम सुराग लगा। लैपटॉप और होम ट्यूटर के बारे में पता चलने पर पुलिस को लगा कि जैसे उनके हाथ एक बहुत बड़ा सुराग लगा है और पुलिस जी-जान से ट्यूटर का पता लगाने में जुट गई। आसपास स्थित सभी कंप्यूटर इंस्टटिट्यूटों में जाकर पूछताछ की गई। आसपास के पीजी हॉस्टलों में रहने वाले युवकों से पूछताछ की गई। साइंटिफिक तरह से लैपटॉप का पता लगाने का प्रयास किया गया। सर्विलांस के माध्यम से मोबाइल फोन का सुराग तलाशा गया। अगर कहें तो इतना कुछ किया गया, जिससे पाताल में छुपे व्यक्ति का भी पता चल जाए, लेकिन यहां पुलिस के लिए नतीजा सिफर ही रहा। पुलिस को कोई ऐसा शख्स भी नहीं मिला, जो उस ट्यृटर का हुलिया भी ठीक से बता दे। बरारू दंपती के बच्चों को भी इस बारे में कुछ नहीं पता था। पुलिस को आज भी उस ट्यूटर की तलाश है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमें उम्मीद है कि जिस दिन लैपटॉप और उस ट्यूटर का सुराग हाथ लग गया, यह पहेली हल हो जाएगी। 

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