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30 Jun 2018

चिकित्सा विभाग पर उठते सवाल : कानपुर


आकाश मिश्रा,(कानपुर नगर)। कानपुर नगर के अंतर्गत घाटमपुर स्थित  बेनी सिंह अवस्थी सामु स्वास्थ्य केंद्र में डॉ कृपाशंकर की तैनाती अस्पताल के ठीक सामने उनकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड आशा नर्सिंग होम होने के बावजूद भी किस शासनादेश  के तहत सर्जन के पद पर की गई। जिसमें मुख्यचिकित्साअधिकारी कानपुर नगर की भूमिका से संदिग्ध प्रतीक होती है। स्थानीय लोगों से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि डॉ कृपाशंकर गृह ग्राम मखौली के निकट गृह तहसील कस्बा घाटमपुर जनपद कानपुर नगर में विगत 2 वर्षों से तैनात है। जो पूरी तरह मानवता विरोधी कार्यों में लिप्त रहता है बिना पैसे के लेनदेन के वह किसी का भी ऑपरेशन नही करता। दलाली के लिए डॉ कृपाशंकर ने अस्पताल में ही कार्यरत सेवानिवृत्त हो चुके एक वार्ड बॉय रामरीत यादव को रुपयों के लें दें के कार्य मे लगाया है। साथ ही अस्पताल में कार्य कर रहे कर्मचारियों  डॉक्टरों और चिकित्सा अधीक्षक में लगातार इस बात का दबाव बनाया जाता है अस्पताल में आनी वाली प्रसूताओं को बरगला कर सी एच् सी के ठीक सामने स्थित आशा हॉस्पिटल भेजे जाए। जिसके लिए उसने सुनियोजित तरीके से प्राइवेट दलालों के एक नेटवर्क भी तैयार कर रखा है। स्थानीय होने कारण उसकी बात न मानने वाले कर्मचारियों और डॉक्टरों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न करता है। और उसकी बात न मानने पर धनबल के चलते सी एम ओ से साँठगाँठ कर चिकित्साअधीक्षक को उसके पद से हटा दिया जाता है।अब सवाल यह उठता है कि शासनादेश के तहत किसी भी वर्ग क और वर्ग ख़ के अधिकारियों को गृह  जनपद में तैनाती का अधिकार नही है फिर भी डॉ कृपाशंकर किस नियम के तहत ग्रह जनपद और ग्रह तहसील में और वो भी अपनी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड  आशा हॉस्पिटल के ठीक सामने की      सी एच् सी में सर्जन के पद पर तैनात किए गए है। अगर उन्होंने शासन से अपने निजी स्वार्थवस तथ्यों को छुपाकर तैनाती ली है तो इसकी जाँच कर ऐसे मानवता विरुद्ध कार्य करने वाले डॉक्टर  कृपाशंकर का तबादला शासनादेश के तहत वर्तमान जनपद से अन्यत्र किसी जनपद में कर देना चाहिये ताकि दिन रात जनहित कर रहे कर्मचारियों और डॉक्टरों को मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न से बचाया जा सके और स्थानीय जनता के साथ आर्थिक न्याय हो सके।

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