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25 Jun 2018

भोपाल सेंट्रल जेल से भागे कैदियों का एनकाउंटर 'उचित' था: जांच आयोग


भोपाल। भोपाल के सेंट्रल जेल से भागे सिमी के सदस्यों की पुलिस एनकाउंटर में मौत को एक सदस्यीय जांच आयोग ने 'उचित' माना है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उस समय जो हालात बन गए थे, उनके हिसाब से पुलिस ने उचित कदम उठाया था। पुलिस का यह कदम कानून के दायरे में था।उल्लेखनीय है कि 30 और 31 अक्टूबर 2016 की रात भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद सिमी के 8 सदस्य एक जेल गार्ड की हत्या कर जेल से फरार हो गए थे। बाद में दिन में पुलिस ने जेल से करीब 8 किलोमीटर दूर मनीखेड़ी गांव में उन्हें घेर कर मार डाला था। इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर ऊंगली उठी थी। बाद में सरकार ने जबलपुर हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायधीश एस. के. पांडे की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग ने 24 अगस्त 2017 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट को सरकार ने सोमवार को विधानसभा में पेश किया। आयोग ने अपनी 10 पन्ने की जांच रिपोर्ट में जहां इस एनकाउंटर को उचित ठहराया है, वहीं राज्य सरकार को जेलों की स्थिति के बारे में कुछ सुझाव भी दिए हैं। आयोग ने कहा है कि विचाराधीन कैदियों द्वारा जेल तोड़ कर भागने की वजह से जो हालात बन गए थे, उन्हें देखते हुए पुलिस ने समय के हिसाब से कानून के दायरे में उचित कदम उठाया था। 
आयोग ने सुझाव दिया है कि बेहतर समन्वय के लिए जेल विभाग को गृह विभाग का ही हिस्सा बना दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रदेश की जेलों में सुरक्षा उपायों की जांच के लिये एक समिति गठित की जानी चाहिए। आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि पंजाब की तरह मध्य प्रदेश में भी जेल कर्मियों के प्रशिक्षण संस्थान खोला जाना चाहिए। इसके साथ ही जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया का भी सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।आयोग ने जेल विभाग द्वारा 10 कर्मचारियों को प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने का उल्लेख अपनी रिपोर्ट में किया है। इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस एनकाउंटर के बाद राज्य सरकार कटघरे में आ गई थी। कई जन संगठनों ने यह आरोप लगाया था कि यह एनकाउंटर फर्जी था। इसी वजह से राज्य सरकार ने एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम का सम्मान रोक दिया था। 

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