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14 Jun 2018

लुटेरों की 'कंपनी' में गोदाम-मैनेजर-लीगल एक्सपर्ट सब : गाजियाबाद


गाजियाबाद। एक फैक्ट्री की तरह काम करने वाले 5 लुटरों और स्नैचरों के गैंग को सिहानी गेट पुलिस ने मंगलवार रात चेकिंग दौरान मालीवाड़ा चौक के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस ने बदमाशों के साथ दिल्ली के एक कथित वकील को भी गिरफ्तार किया है, जो पूरी प्लैनिंग से इन बदमाशों को पुलिस से बचाने का कार्य करता था।पुलिस ने बदमाशों के पास से चोरी और लूटे हुए 65 स्मार्टफोन, एक कार, स्कूटी और चाकू बरामद किए हैं। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों में दुर्गा, अलोपी, पिंटर, नंदन, शमशुल हक और एक नाबालिग शामिल हैं। सभी बदमाश दिल्ली स्थित भजनपुरा के रहने वाले हैं। इस गैंग में शमशुल हक पेश से वकील है, जो इन बदमाशों को पकड़ने जाने के बाद पुलिस के चंगुल से निकालने का कार्य करता था।
सिहानी गेट थाना प्रभारी विनोद पांडे ने बताया कि लूट की इस फैक्ट्री में मशीन, उससे बनने वाले सामान को रखने के लिए गोदाम और पूरे माल की जांच करने के लिए बाकायदा मैनेजर भी नियुक्त थे। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री में मशीन के तौर पर नंदन कुमार और एक नाबालिग थे। ये दोनों विभिन्न बाजारों में जाकर चोरी की वारदात करते थे, साथ ही सुनसान रास्तों पर लूट और स्नैचिंग भी करते थे। वारदात को अंजाम देने के बाद मशीन से जो सामान मिलता था, उसे मैनेजर अलोपी और दुर्गा को दिया जाता था जिसके बाद माल सीधा दिल्ली में गोदाम यानी पिंटर के पास जाता था। वहीं, वारदात या चेकिंग के दौरान अगर कोई पकड़ा जाता था तो कथित वकील शमशुल हक थाने पहुंचकर बदमाशों को छुड़वा लेता था। 
सिहानी गेट पुलिस ने सोमवार को इस गैंग के कुछ सदस्यों को पकड़ा था जिसके बाद इस गैंग का कथित लीगल एक्सपर्ट शमशुल हक थाने पहुंचा और आरोपितों को छुड़वाने के लिए सेटिंग करने की बात कहने लगा। इस पर पुलिस को उस पर शक हो गया जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपित कथित वकील 2003 से लूट और चोरी करने वाले इस गैंग के बदमाशों को बचाने का कार्य कर रहा है। 
बदमाशों ने पूछताछ में बताया कि वे दिल्ली-एनसीआर में लूट और चोरी करते थे। उनके टारगेट पर स्मार्टफोन होते थे। बदमाशों ने 700 से अधिक मोबाइल लूटने और चोरी करने की बात कबूली है। पूछताछ में आरोपित अलोपी ने बताया कि वह माल के गोदाम के पास आने के अगले ही दिन उसे बिहार और झारखंड भेज दिया करते थे। बिहार से कुछ मोबाइलों को नेपाल भी पहुंचा दिया जाता था जिससे पुलिस मोबाइल तक नहीं पहुंच पाती थी। एसएसपी ने बताया कि बदमाशों ने कुछ मोबाइल आईएमईआई नंबर बदलवाकर भी बेचे हैं। 
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह गैंग लूट और चोरी के काम में नाबालिगों को लगाया करता था। जिससे अगर वे पकड़े भी जाएं तो उन्हें थाने से छुड़ाना आसान हो। बदमाशों ने बताया कि शमशुल हक के माध्यम से वे दिल्ली के विभिन्न थानों से कई बार छूट चुके थे। 

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