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30 May 2018

यूपी एटीएस के अधिकारी ने की आत्महत्या : लखनऊ


लखनऊ। यूपी एटीएस में एएसपी राजेश कुमार साहनी ने मंगलवार को अपने ही दफ्तर में सूइसाइड कर लिया। राजधानी में एएसपी एटीएस राजेश कुमार साहनी की पहचान एक ईमानदार व निडर पुलिस अफसर के रूप में थी। पटना के पूर्वी पटेल नगर के रहने वाले राजेश साहनी पुलिस सेवा में आने से पहले मीडिया से जुड़े थे। वह दिल्ली में दो निजी चैनल में कार्यरत रहे। बाद में वर्ष 1992 में उनका चयन प्रांतीय पुलिस सेवा में हो गया। कैसरबाग सर्किल में बतौर सीओ तैनात रहने के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के उन पांच कार्यकर्ताओं को दबोच लिया था, जिन लोगों ने उन्हें कुचलकर मार डालने की कोशिश की थी। जीप न रोकने पर कैसरबाग में वे बोनट पर लटक गए और एसएसपी के कमांड ऑफिस तक लाकर आरोपितों को दबोच लिया। वहीं से उन्हें उनके करीबी 'सीओ बोनट' के नाम से भी पुकारने लगे थे।कैसरबाग बस अड्डे के पास 30 मई 2005 को तत्कालीन सीओ कैसरबाग राजेश साहनी वाहनों की चेकिंग करवा रहे थे। तभी पुराने मॉडल की एक जीप नजर आई। जीप में एसपी का झंडा लगा था और उस पर ट्रैफिक रूल्स को दरकिनार कर लाइटें लगी हुई थीं। सीओ को गाड़ी संदिग्ध नजर आई तो वह खुद ही आगे बढ़कर उसे रोकने लगे। 
चालक ने जीप तो रोक दी, लेकिन खुद को एसपी के दिवंगत नेता का दत्तक बताते हुए रौब गांठना शुरू कर दिया। सरकार एसपी की थी और एसएसपी जीके गोस्वामी थे। राजेश साहनी खुद को एसपी नेता बताने वालों के अर्दब में नहीं आए और उन्होंने उनसे नीचे उतरने को कहा। बेअंदाज युवकों ने नीचे उतरने के बजाए, गाड़ी आगे बढ़ा दी और राजेश को कुचलने का प्रयास किया। राजेश ने जान के बजाए फर्ज को तरजीह दी और उन्हें दबोचने के लिए बोनट पर लटक गए।एसपी कार्यकर्ताओं ने जीप सीएम आवास की ओर ले जाने की नीयत से गाड़ी 5-केडी की ओर भगा दी, लेकिन साहनी बोनट पर लटके रहे। वायरलेस पर मेसेज प्रसारित होते ही पुलिस ने घेराबंदी शुरू की तो उन्होंने जीप 5-केडी तक ले जाने के बजाए एसएसपी के कमांड कार्यालय परिसर में दाखिल कर दी। आरोपित युवक भागकर एसएसपी के कार्यालय में गए और खुद को बेगुनाह बताने लगे, लेकिन राजेश साहनी ने अपनी बात एसएसपी के समक्ष दृढ़ता से रखी और आरोपित जेल भेजे गए। तभी से राजधानी में उनकी पहचान 'सीओ बोनट' के रूप में हो गई थी। 

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