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13 Mar 2018

सिर्फ सरकारी फाइलों में ही शौंचमुक्त हो रहे हैैं गांव : पड़ताल

इल्फातपुर को फ़र्ज़ी तरीके से कर दिया शौचमुक्त
अमित कुमार तिवारी,(कासगंज)। सरकारी वेबसाइट व फाइलों के अनुसार जनपद में दर्जनों गांव शौंचमुक्त घोषित किये जा चुके हैं अर्थात प्रशासकीय घोषणा के अनुसार जिन गांव को शौचमुक्त घोषित किया गया है उन सभी गांव में शत प्रतिशत शौंचालय बन चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात इसके विल्कुल उलट हैं, शौचमुक्त घोषित किये जा चुके इन तमाम गांव में से अमांपुर ब्लॉक के एक गांव इल्फातपुर में जब भौतिक सत्यापन किया गया तो गांव के हालात और सरकारी फाइल की घोषणा आपस में विपरीत नज़र आयी, सरकारी फाइल के अनुसार इस गांव में सभी 70 में से सभी 70 शौंचालय पूर्ण बनाये जा चुके हैं लेकिन इस गांव के ही वो तमाम 20 से 25 लोग जिनमें मुंशीलाल रामप्रसाद नरेश कल्लू  हरदेव सुनील ठुल्ली पवन विपिन हुब्बलाल जयवीर विनोद  राजकुमार जगदीश रामसिंह  हरपाल चंद्रपाल कमलेश प्रेमवीर बदनसिंह राकेश आदि ने बताया कि उनके घरों में शौंचालय ही नहीं हैं, गरीबी के चलते वह शौंचालय नहीं बनवा पाए, इसलिए वह और उनके परिवार आज भी खेतों में शौंच करने को मजबूर हैं।

वहीं राजेश नेत्रपाल ममता सुनीता हरिओम लालवती मटरू पुष्पेंद्र आदि ने बताया कि उनके यहां शौंचालय तो बने हैं लेकिन अभी तक पूरी किश्त न मिलने के कारण सभी शौंचालय अपूर्ण स्थिति में पड़े हैं जिसके चलते वह आज भी खेतों में शौंच को जाते हैं। अधूरे शौंचालय को लेकर पात्रों ने बताया कि उन्हें शौंचालय बनाने के लिए सिर्फ एक ही किश्त मिली है दूसरी किश्त के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है, इस तरह इल्फातपुर में 70 शौंचालय बनने थे जिनमे अधिकतर लोगों के यहां या तो शौंचालय बने ही नहीं या फिर जिनके बने वो अभी अधूरे पड़े हैं, ऐसे में सरकारी वेबसाइट और सरकारी फाइलों में इन तमाम गांव को फ़र्ज़ी तरीके से शौचमुक्त घोषित क्यों किया जा रहा है।

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